गाँव सही है या फिर शहर ।
Who is the best city or village |
गाँव Best हैं या शहर...
पहले लगता था गाँव अच्छा है ,अब लगता है शहर अच्छा है ,पता नही ये देर से समझ आई हुई बात है या ये सब शुरू से ऐसा ही था ,गाँव मे किसी का पट्टीदार उसका जमीन हड़प रहा है या हड़पने की कोशिश कर रहा है ,पड़ोस वाला उसकी तरक्की देख के जले जा रहा है ,रिश्तेदार आपका अच्छा सोचने से ज्यादा खराब सोचे जा रहा है ,झगड़े मारपीट में केस चले जा रहा है
,फलाने की बेटी बहु का चक्कर चिलाने से चल रहा है इसपे खुसुर फुसुर हो रहा है ,खुद से ज्यादा दूसरे के कामो में लोग टांग अड़ाने की सोचे जा रहे है ,ये ईर्ष्या, जलन ये सब पहले से ही गाँव मे था या अब हुआ है ? शायद पहले का गाँव भी ऐसा ही था,कहा जाता था कि UP बिहार के गाँव मे वही घर सुकून से है जिसके घर मे गुंडे पल रहे हो या IAS पल रहा हो अब ये लाइन सटीक लगता है , जबकि शहर में किसी को किसी से कोई मतलब नही है और यही शायद सुकून की वजह देती है ,पेट भरने के लिये नौकरी है ,यही वजह है कि लोग सदियों से शहर की तरफ भागते आ रहे है ,एक आम आदमी भी शहर में सुकून ढूंढ लेता है ।
#पलायन
#CityIsBetterThanVillage...

